रूठना मनाना शायरी

नमस्ते, जिंदगी में रूठना मनाना ये सिलसिला चलता रहता है। ऐसे ही विषय पर हम शायरी लेकर आए है। रूठना मनाना शायरी इन हिंदी, मनाने वाली शायरी, नाराजगी शायरी, रोमांटिक रूठे प्यार को मनाने वाली शायरी, नाराजगी शायरी 2 लाइन ये शेयर कीजिये।

रूठना मनाना शायरी

इस कदर मेरी दोस्ती का इम्तेहान तो मत लिजीये, खफा हो क्यों ये तो बता दिजीये, माफ कर दो अगर हो गई हो हमसे कोई भूल, पर ऎसे याद ना कर के हमे सजा तो मत दिजीये…

🥱वो मेरा दोस्त जो खुदा जैसा लगता है, दिल के पास है फिर भी जुदा सा क्यों लगता है, काफी दिनों से आया नहीं कोई पैगाम उसका, शायद कोई बात पे हमसे खफा सा लगता है…

बिते हुए कल मे फिर से जाने का दिल करता है, फिर से हँसने और हँसाने का दिल करता है, जो कुछ पल साथ बिताये थे हमने, वो लम्हा फिर से जी जाने का दिल करता है…

जिस पल मे टूट जाते है सपने, उस पल मे ही रूठ जाते है अपने, हमे किसी को मनाना नही आता, शायद तभी तो हमसे रूठ जाते है अपने…

खफा होने से पहले खता बता देना, रुलाने से पहले हँसना सिखा देना, अगर जाना हो कभी हम से दूर आप को, तो पहले बिना साँस लिए जीना सिखा देना…

वो एक दोस्त जो खुदा सा लगता है, बहुत पास है दिल के फिर भी जुदा सा लगता है, बहुत दिनों से आया नही कोई पैगाम उसका, शायद किसी बात पे खफा सा लगता है…

चुप रहते है के कोई खफा न हो जाये, हमसे

कोई रूसवा न हो जाये, बडी मुश्किल से कोई अपना बना है, डरते है की मिलने से पहले ही कोई जुदा न हो जाये…

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मनाने वाली शायरी

दर्द क्या होता है बताएँगे एक रोज़, प्यार की ग़ज़ल सुनाएंगे एक रोज़, थी उनकी ज़िद की मैं जाऊं उनको मनाने, मुझको यह वहम था वो बुलाएँगे किसी रोज़!

कोई हमे भूल जाने की ज़िद में है, कोई हमे आज़माने की ज़िद मैं है, भूलने वाले भूले मुझे तो कोई गम नहीं, क्योकी अपना कोई हमे पाने की ज़िद में है

दर्द होता नहीं दुनिया को दिखाने के लिए, हर कोई रोता नहीं आँसू बहाने के लिए, रुठने का मज़ा तो तब आता है, जब कोई अपना होता है मनाने के लिए…

ज़िंदा लोगों की कदर नहीं करते ये बेदर्द दुनिया वाले, रो रो कर याद करते है मर जाने के बाद…

बेशक मोहब्बत ना कर पर बात तो कर, तेरा यु खामोश रहना बड़ी तकलीफ देता है..!

रिश्तों का विश्वास टूट ना जाए, प्यार का साथ कभी छूट ना जाए, ए खुदा गलती करने से पहले मुझे संभाल लेना, कही मेरे गलती से मेरा महबूब रूठ ना जाए…

ये रूठना , मनाना अदाएँ हैं मोहब्बत की चटपटा न हो तो खाने में मज़ा क्या है ?

अकेले में तुम्हारी याद आना अच्छा लगता है तुम्ही से रूठना तुमको मनाना अच्छा लगता है।

रूठना अगर तुम्हारी आदत है, तो तुम्हें मनाना मेरा कर्तव्य है। तुम हजा़र बार रूठोगी, तो मैं लाखों बार मनाऊंगा….

हर रोज़ की अब ये दास्तां हो गई.. रूठना.. मनाना.. फिर रूठ जाना..!!

नाराजगी शायरी

ये झगड़ा किस बात का है.. ये रूठना मनाना किस लिये है.. दो पल की ज़िन्दगी है.. आ हंस-बोल के काट लें.. 🙂

न रूठना आप हमसे कभी, हमें मनाना नहीं आता, चाहत कितनी है आपके लिए जताना भी नहीं आता, इंतज़ार करते हैं कब मिलेंगे आपसे, मिलने का कोई बहाना भी नहीं आता!

कितना मुश्किल है मनाना उस शख्स को .. जो रूठा भी ना हो और बात भी ना करे …

दुश्मन के सितम का खौफ नहीं हमको, हम तो दोस्तों के रूठ जाने से डरते हैं……!!

कोई अपना हमसे जब भी रूठ जाता है, ऐसा लगता साथ रब का छूट जाता है.

चाहता था मै भी तुम्हे दिल की बात सुनाना, पर तुमने कहा आता नहीं मुझे रूठे को मनाना

इस कदर हम यार को मनाने निकले उसकी चाहत के हम दिवाने निकले.. जब भी उसे दिल का हाल बताना चाहा उसके होठों से वक़्त न होने के बहाने निकले..

नाकाम थीं मेरी सब कोशिशें उस को मनाने की पता नहीं कहां से सीखी जालिम ने अदाएं रूठ जाने की

उससे, खफ़ा होकर भी देखेंगे, एक दिन.. कि, उसके मनाने का अंदाज़ कैसा है..!

मोहब्बत आजमानी हो तो बस इतना ही काफी है, जरा सा रूठ कर देखो मनाने कौन आता है…

रूठे हुये हो क्यों में मनाने को हु तैयार कीमत बता दो मान जाने की में जिन्दगी लुटाने को हु तैयार

मेरी ज़िन्दगी में खुशियाँ तेरे बहाने से हैं…. आधी तुझे सताने से हैं आधी तुझे मनाने से हैं…

वक्त कम है साथ बिताने के लिए इसको ना गंवाना रूठने मनाने के लिए मेरे मेहबूब प्यार कर लिया हमने आपसे बस थोड़ा साथ देना इसको निभाने के लिए

रोमांटिक रूठे प्यार को मनाने वाली शायरी

वो रूठे तो सही हम मनाने का वादा करते है, दिल तोडना है मेरा तो बेशक तोड़ दे वो इस दिल के बिना भी हम उनको चाहने का वादा करते है

खत्म कर दिया किस्सा, अब रुठने मनाने का.. सुना है वो शख्स हैरान है, मेरे इस रवैये से..

यूँ रहा रुठने-मनाने का सिलसिला तेरी बेरुखी भी अब वफ़ा लगती है !!

शहर में वो मजा नही है क्योकि तेरी रुठने मनाने की सज़ा नही है

यूँ तो….. प्यार की हर अदा निराली हैं पर रुठने मनाने की अदा सबसे आली हैं

रुठने मनाने के फलसफे से तंग आ गया हूँ, ऐसा कर ए मोहब्बत, अब तू मेरा हिसाब कर दे..!!

जिंदगी जीने के लिये वक्त हैं बहोत ही कम और तुम्हें रुठने मनाने का खेल पसंद हैं

ये रुठने मनाने के सिलसिले बड़े ही प्यारे होतेहै तुमसे मिलने परही ये बात जानी हमने

“ग़र कटती हें उम्र तुम्हे मनाने मेँ,तो कट जाने दो, वैसे भी बिन तुम्हारे जिंन्दगी भी कंहा जिंदगी हें।।”

तुम रूठो तो तुम्हे मनाने आ जाएंगे कई हम रूठे भी तो बताओ किस के भरोसे…..

तुम हंसती हो मुझे हसाने के लिए,तुम रोती हो मुझे रुलाने के लिए। एक बार तो रुठ के देखो,मर जाएंगे तुम्हे मनाने के लिए।।

नाराजगी शायरी 2 लाइन

सोच रखी है बहुत सी बातें तुम्हे सुनाने के लिए….!!! लेकिन तुम हो के आते ही नही हमे मनाने के लिए….!!!

कितनी बातें, जो आती आधी रात कहने को तुम्हे… उन् ख्वाबो में जिनमे तू करती बात, मुझे मनाने की… कभी ना छोड़ के जाने की !!

आज खुद को भुलाने को जी कर रहा है, बेवजह रूठ जाने को जी कर रहा है, तुम्हे वक़्त शायद मिले न मिले, आज खुद को मनाने को जी कर रहा है।

चला ह सिलसिला कैसा ये रातों को मनाने का तुम्हे हक़ दे दिया किसने दियो का दिल दुखने का

तरिके तो कई है… तुम्हे अपने पास रखने के… पर मजा तो तब है जब तुम हमें मनाने का हुनर जानो..

जब तुम रूठ जाते हो, तो और भी हसीन लगते हो। यही सोचकर तुम्हे मनाने का मन नही करता।

तुम तरकीब निकालते हो दिल जलाने की,, हम तरकीब निकालते है तुम्हे मनाने की.

तुम्हे तो मनाना भी नहीं आता………… रूठू तो……कैसे रूठू……!! मनाने वाले तो…… चाँद ………… को थाली में ले आते हैं…

रूठने का हक़ है तुझे, वजह बताया कर। ख़फ़ा होना गलत नही, तू खता बताया कर।

बिन बात के ही रूठने की आदत है, किसी अपने की चाहत पाने की चाहत है, आप खुश रहें, मेरा क्या है, में तो आईना हूँ मुझे टूटने की आदत है।

नया नया शौक उन्हें रूठने का लगता है खुद ही भूल जाते हैं रूठे थे किस बात पर

हर घड़ी का ये बिगड़ना नहीं अच्छा ऐ जान… रूठने का भी कोई वक़्त मुक़र्रर हो जाए…

मनाने रुठने के खेल में हम बिछड़ जाएंगे … सोचा नहीं था

मुद्दतों बाद आज फिर परेशान हुआ है दिल, जाने किस हाल में होगा मुझसे रूठने वाला….

वो मेरे रूठने पर इस तरह मनाती है… कभी तो ज़ी चाहता है बेवजह उससे रूठ जाऊं…!!!

Ruthane manane ki shayari

रूठने की उसकी अदा भी अजब है, बिन कहे करता है शिकायतें गजब है ….

उफ़ —उसके रूठने की अदाये भी गजब की थी… बात बात पे कहना की ” सोच लो फिर बात नहीं करुँगी ”

ज़माने से रुठने की जरूरत ही क्यों हो जब मेरे अपने ही मेरे बने रकीब हो

सारी उम्र करते रहे इंतज़ार तेरे रुठने का कभी तो मौका दिया होता तूने मनाने का

तुझे खबर भी है इसकी ओ रूठने वाले, तुम्हारा प्यार ही मेरा कीमती खजाना था

तू जो रूठ्ने लगा है दिल टूटने लगा है अब सब्र का भी दामन मुझसे छूटने लगा है

गलती एक करी थी उसने जो हमने सची मानी थी…° हमने जाने को कहा और उसने रुठने की ठानी थी़.

हमें तो रूठने का सलीका भी नहीं आता जाते-जाते खुद को उसके पास ही छोड़ आये ………

…रूठनें का लुत्फ़ आया ही नहीं, आप पहले ही मनाने आ गए…

Shayari on miss u hindi

उन्हें रूठने में वक़्त नहीं लगता मेरे पास वक़्त नहीं मानाने को …

जंग न लग जाये मोहब्बत को कहीं… रूठने मनाने के सिलसिले जारी रखो..।।

रूठने-मनाने का, सिलसिला कुछ यू हुआ। मान गया था मगर, फिर रूठने का दिल हुआ।।

बहाने बनाना कोई उनसे सीखे, बनाकर मिटाना कोई उनसे सीखे, सबब रूठने का भी होता है लेकिन, यूं ही रूठ जाना कोई उनसे सीखे !

नाराज़गी नहीं है कोई … मै किससे शिकायत करूँ! . . . . ये रूठने मनाने की रस्म तो अपनों में हुआ करती है!!

रूठने की कोई…….दास्ताँ रही होगी यकीनन कोई …….. खता रही होगी तुमने सलाम नहीं लिया होगा उनका यही तो बात दिल को सता रही होगी

Roothna Manana Shayari

रूठने की कोई…….दास्ताँ रही होगी यकीनन कोई …….. खता रही होगी तुमने सलाम नहीं लिया होगा उनका यही तो बात दिल को सता रही होगी

बस एक यही आदत तो मेरी खरा़ब है … रूठने के लिये ना जाने कितने बहाने चाहिये और मान जाने के लिये …तेरा बोलना ही काफी है …

हर बार रिश्तों में और भी मिठास आई है, जब भी बाद रूठने के तू मेरे पास आई है


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